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Mangal DoshBook

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"मंगला दोष" का नाम सुनते ही जनमानस के बीच भय एवं आशंका उत्पन्न होजाती है कि उनके प्रिय संतान के कुंडली में विवाह ,दाम्पत्य जीवन एवं संतान से सम्बंधित कोई भयावह योग है। जबकि सत्यता कुछ और ही है। सनातन धर्म के अनुसार विवाह के पूर्व जन्मांग के मेलापक की प्रथा आदि काल से ही चली आरही है परन्तु अशिक्षा एवं तथाकथित ज्योतिषी व पंडितों की धनार्जन की मंशा के कारण मंगला दोष का अर्थ विनाशकारी स्थिति के रूप में ही जाना जा रहा है। जबकि सत्यता विल्कुल अलग है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि प्रति 100 जन्म लेने वालों में लगभग 42 लोग मंगला होते है। जबकि मंगला दोष मात्र 5 से 6 लोगों में ही होता है। अर्थात प्रति 100 लोगों में मंगला दोष वाले मात्र 5 से 6 ही होते है लेकिन तथा कथित ज्योतिषी अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए सभी को मंगला दोष से पीड़ित बता देते है। भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब मंगल नामक ग्रह जन्म,चंद्र, शुक्र या नवांश कुंडली में लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम तथा द्वादश भाव में पाया जाता है तो जातक अथवा जातिका को मंगला अथवा मंगली योग में जन्म लेने वाला समझा जाता है लेकिन प्रत्येक मंगला या मंगली योग में जन्म लेने वाले को मंगला दोष अथवा मंगली दोष वाला कहना मूर्खतापूर्ण है।

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Product TypeBooks
Price (excl. tax)₹500.00
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Availability In stock (10 available)
Tags Best Seller, Trending
Author Pandit Rajesh Tiwari
Pages 199
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